बदन का खून खौलने लगता है

जिस देश में संसद पर आक्रमण के लिये मृत्युदण्ड प्राप्त आतंकवादी को फाँसी नहीं होती और उसका खुलेमाम बचाव किया जाता है वहीं मालेग़ाँव विस्फोट के लिये आरोपी बनायी गयी साध्वी को मीडिया द्वारा दोषी सिद्ध होने से पहले ही आतंकवादी ठहरा दिया जाता है। केन्द्र सरकार के घटक दल खुलेआम इस्लामी आतंकवादी संगठन सिमी के पक्ष में बोलते हैं और बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश की नागरिकता देने की वकालत करते हैं और विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों के पाठ्यक्रम को प्रतिबन्धित करने की बात करते हैं क्योंकि वे शिवाजी, राणाप्रताप को आदर्श पुरुष बताते हैं। रामविलास पासवान का तर्क है कि विद्याभारती के विद्यालय गान्धी के स्वाधीनता आन्दोलन में भूमिका पर प्रश्न खडे करते हैं इसलिये इस पर प्रतिबन्ध लगना चाहिये। अर्थात देश में विचारों की स्वतंत्रता पर आघात होगा। इतना तो स्पष्ट है कि हिन्दू धर्म और संस्कृति एक बार फिर अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा है जब सेक्युलरिज्म के नाम पर हिन्दू होना अपराध ठहराने का प्रयास किया जा रहा है।
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ऊपर की पंक्तिया और ऐसे ही चिठा पढ़ते हुए बदन का खून खौलने लगता है. जी करता है कोई अनजानी शक्ति मिल जाये और उन सरे भ्रष्ट नेताओ और हुक्मरानों को सरेआम फासी पर लटका दु जो ये करते है ! क्या तर्क बनता है की मृत्युदण्ड प्राप्त आतंकवादी (अफजल गुरु) को फाँसी नहीं हुई और वो आजतक खुलेआम घूम रहा है. ! शिवाजी, राणाप्रताप, भगवन राम की बाते करना अपने ही देश में एक गाली हो गया है, ऐसी बाते करे तो अपने मुसलमान भाइयो का दुश्मन मान लिया जाता है.!
क्या उदार होने की यही सजा है ! ऐसी ही बाते जब मै अपने साथी मित्रो के साथ करता हूँ तो पता है वो क्या कहते है
" यार *** सर क्या दिन भर पढ़ते और हो और लिखते रहते हो.. छोडो ये सब, सब के सब हम पब्लिक को उल्लू बनाने के लिए ये नेता लोग ऐसा करते रहते है.! साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को अपराध साबित होने के पहले ही अपराधी (देश द्रोही) करार कर दिया जाता है और देश द्रोही (अजमल आमिर कसाब) को जेल में दामाद के तरह treat किया जाता है. अफजल गुरु को आज तक सजा नहीं हो पाई और कभी होगी भी नहीं. " इसलिए इन सब बातो को छोडो और कुछ नयी उमंग भरी प्रोग्रेसिव बाते लिखो ! जिससे मन को सुकून मिले

वो कट्टर है बात बात (धर्म) की बात पर लड़ते है तो लड़े, हम क्यों अपना energy loss करे ! अपनी ताकत को विकाश में खर्च क्यों न करे ! मदरसे (जिहाद) की पढाई कर हम किसी बड़े ओहदे की दावेदारी नहीं पेश कर सकते.

एक हमारे मुहम्मदन मित्र है, जिनकी अक्सर ये सिकायत रहती है हमें हिंदी या इंग्लिश कम आती है इसलिए हम आगे नहीं बढ़ पाए (वो एक sampling टेलर है) और अभी कुछ ही दिन हुए है वे एक दिन हाथ मिलते हुए बोले भाई जान मुझे जार्डन का वीसा मिल गया है, जा रहा हूँ सम्प्लिंग टेलर के तौर पर १३४ JOD मिलेंगे ८ घंटे के (यानि १३४ x 69.40 = Rs 9300/-) जबकि यहाँ भी एक sampling टेलर जो की कुछ इंग्लिश या हिंदी पड़ना जनता हो उसकी तनख्वा १२०००/- है !

इसलिए हमें अपना ध्यान विकाश और तर्रकी में लगाना चाहिए नकि इन बे सर पैर की बातो में ...

क्या सुनना पसंद करेंगे आप ?

ये लडके हमारे बारे में क्या क्या बाते करते होंगे.?
दूसरी लड़की : बिलकुल हमारे तरह जैसे हम उनके बारे में बाते करती है
पहली लड़की : हाय राम इतनी गन्दी बाते करते है लडके.

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यह एक चुटकुला है, पर है बिलकुल सच ! क्या क्या कहा आपने कहा की बात ले आया मै, जनाब बिलकुल संच फ़रमाया है मैंने ! बिस्वास न हो तो किसी लड़की से कुछ देव दास वाले अंदाज में बाते कर के देख लीजिये आपको पता चल जायेगा ! सारी की सारी लड़किया आपको सायद भैया का खिताब दे देंगी या नाम के साथ एक सरनेम "फलाना या चिलाना जी"

तो जनाब "फलाना या चिलाना जी" सुनना पसंद करेंगे या "hi dear kal kaisa raha ! kya kya kiya (with smile)" सुनना पसंद करेंगे ! अगर अंग्रेजी वाला शब्द सुनना चाहते है तो ...

महान है हमारा लोकतंत्र


एक खबर !

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की जांच के लिए गठित लिब्राहन आयोग ने १७ साल बाद मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

मंगलवार को जस्टिस एम.एस. लिब्राहन ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। उस समय गृह मंत्री पी. चिदंबरम भी वहां मौजूद थे। रिपोर्ट में क्या है, अभी इसका खुलासा नहीं हो पाया है। लिब्राहन आयोग के कार्यकाल को 48 बार बढ़ाया गया।

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महान है हमारा लोकतंत्र, महान है हमारे नेता, महान हैं हमारा राज तंत्र, जहा एक आयोग बैठाई जाती और उसका निष्कर्ष १७ साल बाद आता है और तो और उसमे क्या है इसका खुलासा भी अभी तक नहीं हुआ है , जो की एक सम्बेदंशील मुआमले पर बैठाई गई आयोग थी तो बाकी के आयोग का क्या होता होगा ??? जो .....

क्या सरकार इस बात का जवाब देगी की आयोग के पुरे कार्यकाल में कितने पैसे खर्च हुए ? आज तक जितने भी आयोग गठित हुए है सभी के रिपोर्ट जमा हुए ? या सरकार ही भूल गई की कोई आयोग भी गठित हुआ था ?

१७ साल !!! यार १७ साल, कम नहीं होते ! मुझे याद है जब मैं कक्षा ७ वी में था तब की बात है उस दिन हमारा स्कूल बंद हो गया था ! स्कूल बंद होने का कारण बाद में पता चला की "दो भाइयो ने दूसरो की बात सुन कर अपने ही घर में आग लगा कर एक दुसरे को ही लहूलुहान कर लिए थे"

परसाद फूफा नमस्ते !

ये सरलवा कहा रे ? येतना जल्दी में कहा ? ताडीखाने के पास बैठे 'हल्खोरी प्रजापति और चनन सिह' ने टोक ही दिया ! कवनो के घर फिर कोई जानवर मर गया है क्या ? जो ....

गाँव के अन्य "कुछ उची" जाती के लोग सरल को सरल चमार या सरलवा कहने में अपनी बड़प्पन और उची जाती के होने का परिचय देते है !

साईकिल पर सरल के पैर आज कुछ जयादा ही तेजी से चल रहे हैं ! आज उसका लड़का (प्रदीप) शहर से गाँव आया है न पुरे 1 साल बाद ! क्या खिलाऊ क्या पिलाऊ प्रदीप्वा को इसी उधेड़बुन में सरल कुछ ज्यादा ही जल्दी में पंसारी की दुकान पर बहुच जाना चाहता है...

सरल और उसके टोले (मोहल्ले) वाले अब मरे हुए जानवरों के खाल नहीं उतारते और ना ही अब मैला ढोते हैं ! और यही बात ताडी पीते लोग (प्रजापति और चनन सिंह) को खटकती है और इसलिए सरल को सरलवा या चमरा कह कर अपनी उचता का परिचय देते रहते हैं !

यह सब अच्छा काम नहीं है, सरल सबको कहता है ! अपने बच्चो का पढाओ-लिखाओ हुसीयार बनाओ ! मरे हुए जानवरों को मत छुयो, मैला मत उठाओ, मेहनत-मजदूरी करो अ़ब तो सरकार भी रोजगार गारंटी योजना चला रही हैं...उसका लाभ उठाओ...पढो, पढाओ बच्चो को हुसीयार बनाओ... यही बात उची जाती के लोगो को खटकती है...!

का रे परदिपावा, कब आया तू सहर से एक बड़े बुजुर्ग लल्लन बाबा चाय की चुस्की लेते हुए प्रदीप को देखकर पूछ बैठे !
चाचा आज ही आये है नमस्ते - प्रदीप ने हलवाई 'परसाद फूफा' के योर देखते हुए जवाब दिया !

उससे ऐसी जवाब की उम्मीद नहीं थी लल्लन बाबा को सो हलवाई की तरफ देखकर कहे देखो इ चमरा के लईका को कैसे बेसरमी से बोल रहा है... तनिको लूर-सहूर नहीं है बड़कन से कैसे बात करत जात हैं ! पढ़ लिख कर शहर से दुई पैसा क्या कमा लिए बड़कन का आदर सत्कार ही भूल गए! लल्लन बाबा को उम्मीद थी की प्रदीप उन्हें लगभग रोते हुए, कमर के बल झुक कर लल्लन बाबा के पैरो को छूकर ये कहे "सब आपकी किरपा है बाबा"

बाबा से ऐसी उलाहना सुन कर भी प्रदीप हसते हुए पास ही के एक लकडी के तखत पर बैठ गया, मुडी-तुडी और लगभग फटी हुई आज ही की अख़बार उठाकर हलवाई से बोला... परसाद फूफा नमस्ते, एगो गरमा-गरम एस्पेशल चाय पिआव (हलवाई सभी छोटे-बड़े के बिच परसाद फूफा के नाम से मशहूर थे)

अपने लिए 'परसाद फूफा नमस्ते' सुनकर परसाद फूफा मन ही मन खुश होते हुए चाय की एक केतली चूल्हे पर चढाने लगे ! कच्चे अधजले कोयले के वजह से पुरे गुमटी में धुया फैला हुए था ! उस धुएं भरे गुमटी में बैठकर 'परसाद फूफा' के हाथ से बने चाय और आलू के पकोडे खाने का स्वाद पुरे गाँव में मशहूर था !

चाय बना और परसाद फूफा ने चाय प्रदीप की योर बढाया, कुछ घबडाते हुए जैसे कोई देख ले तो, उनपर मुक़दमा कचहरी हो जाये.

अरे बौराए गए हो क्या परसाद ? इ चमरा के लईका को सीशा के गिलास में चाय दे रहे हो और फिर इसी गिलास में कल हमें भी चाय पिलाओगे अउर हमर धरम भ्रस्त करोगे ! अरे कोई दुसरे बर्तन में चाय पिलाओ ! लल्लन बाबा बोल पड़े ! चमार, सियार और भूमिहार को एक ही तराजू में तौल रहे हो ! तुम तो चाय का दुई रूपया झट से पल्ले में धर लोगे, हमार धरम भ्रष्ट होगा सो अलग !

पास ही जमीन पर बैठकर चाय पीती हुयी 'बहीरी' डोमिन (Sweeper) से यह सब देखा न गया और बोल पड़ी ! अरे चुप करो बाबा रोज दारूभट्टी के पास उ कलुआ मुसहर के पैसे से कच्ची शराब और उसी के दोने से उसीनल (boiled) चाना खाते हो तो तुम्हारा धरम भ्रष्ट नहीं होता ! दारू पिने के बाद महतो के दुकान से पाच रुपीया के मुर्गा के गोडी खरीद कर खाने में कोई धरम भ्रष्ट नहीं होता है क्या ? अउर उ दिन जब कलुआ मुसहर के संग उसकी मेहरिया रही, अयूर तू उसके बेलाउज में हाथ डाले के कोशिश करत रहा तब तोहर धरम भ्रष्ट नहीं होता रहा ? एक ही सास में बोल गई 'बहीरी', जैसे आज ही अपने मन का सारा भड़ास निकाल लेगी अउर बड़कन के खिलाफ उसके मन में जितना भी जहर भरा है उसको उगल देगी !

प्रदीप को तो कुछ समझ ही नहीं आया की क्या बोले और न बोले ! तब तक कुछ लडके जो प्रदीप के ही उम्र के थे वहा आ चुके थे और सारा माजरा समझते हुए, उनमे से एक जो की उची जाती का ही था बोला पड़ा, अरे लल्लन बाबा आप तो उच-नीच का बिज बोकर अपने फायदे का फसल काट चुके, अपनी झूठी शान बनाये रखने के लिए उच-नीच के बहाने अपनी पूजा करवाते रहे, बहुत हो चूका ! अब तो हम नवयुकवो को भाईचारा और बराबरी का बिज बोने और तरक्की का फसल कटाने दो !

का हो प्रदीप भाई कैसे हो ? कब आये ? वह लड़का प्रदीप से बोल पड़ा, अरे चाय पियो, बड़े बुढो के बात का बुरा नहीं मानते ! इनकी थोडी उम्र हो गई और दिन रात यही पड़े रहते है सो इनकी मत मरी गई है ! इनको क्या पता इ सब छोट, बड, उच, नीच कुछो नहीं होता है ! छोडो जाने दो चाय पियो और बताओ, सहर में सब कुशल मंगल तो रहा न ? .....

लल्लन बाबा भुनभुनाते हुए दूसरी योर चले गए जहा कुछ ही दुरी पर कुछ लोग चिलम में भरने के लिए गांजे की मर्रम्त कर रहे थे !

क्या यही प्यार है..

चलते-चलते कहीं रूक जाती हूं , बैठे - बैठे कहीं खो जाती हूं मैं , कुछ अच्छा नहीं लगता , क्या यही प्यार है ?

लड़का : यह कमजोरी के लक्षण है बेवकूफ , ग्लोकोस पियो करो ...

बोलो और बेधड़क होकर बोलो

यार वो बहुत बोलता, है पर है सही... लेकिन यार उसको तो शर्म भी नहीं आती बोलने में - तो क्या हुआ शर्म ही करता तो बोल कैसे पता...और आज देखो वो लोग उसकी कितनी तारीफ कर रहे हैं....

कुछ ऐसे ही वाक्य हम भी कभी कभी बोलते है या सुनाने को मिल जाता है किसी के बारे में ... क्यों मैंने सच कहा न ? जनाब कहना ये चाहता हूँ की बोलो और बेधड़क होकर बोलो, हम अपने आसपास, दोस्तों की महफिल में, सोसाइटी में, बस में, किसी मंच पर, या कही भी कुछ बोलते-बोलते रह जाते है और बाद में सोचते है मुझे भी वहा कुछ बोलना चाहिए था, पर अब पछताए होत क्या जब....

कुछ लोग अक्सर अपनी बात दुसरो के सामने नहीं रख पाते है, मन की बात मन में ही रख लेते है, सोचते है बोलूँगा तो कैसा लगेगा, बोलते हुए मेरे हाव-भाव कैसे होंगे, सामने वाला मेरे बात का कैसे प्रतिक्रिया देगा, मेरे बात को गंभीरता से लेगा की नहीं..ब्ला.. ब्ला..ब्ला......

तो बोले खूब बोले, शर्म लिहाज छोड़कर, अपनी मन की बात बोले, अपनी प्रतिक्रिया दे, कुछ प्रतिवाद करना हो तो जरुर करे ये कभी अपने मन में हिन् भावना को उपजने न दे. पुरे बिश्वास के साथ बोले सामने वाले के आखों में आखे डालकर बात करे, जो भी बोले विश्वाश के साथ बोले और फिर देखिये आपके बिचार का लोग कैसे स्वागत करते है...

नोट : यह मेरे निजी अनुभव पर आधारित है... जनाब कुछ गलत कहा हूँ तो मुआ.....फ..... पर......

'जय हो, स्‍लमडॉग और' चड्डी की भिड़ंत

'जय हो, स्‍लमडॉग और' चड्डी की भिड़ंत

अंग्रेजी भाषा को तलाश है अपने मीलियन वर्ड यानी दस लाखवें शब्द की और इसके लिए हिंग्लिश के तीन शब्द जय हो, स्लमडॉग और चड्डी को मौका मिला है. देखना ये है कि क्या जय हो की एकबार फिर से जय होगी. स्लमडॉग का फिर से डंका बजेगा या फिर इस शब्दों की कबड्डी में चड्डी जीतेगी

बहुत ही अच्छा भिडंत ! बहुत ही नायब ! दो ही सूरत में जीत हमारी ही होगी, 'जय हो, स्‍लमडॉग और 'चड्डी' आब बड़े लोगो का शब्द बन जायेगा !

मेरे ख्याल से चड्डी को "ताज पहनाया जाना चाहिए" क्योंकी चड्डी का नाता 'मोगली' से भी तो है..


नोट : यह केवल लेखक का बिचार है ! कोई मान हानी का दावा न करे !

दिल का दर्द ! क्या जाने कोई !



एक बार राज ठाकरे से भी इस मसले पर बात चित करना चाहिए.....
क्यों राज साहब आपका कोई नजदीकी वाला तो इनमे नहीं होगा....
क्या कहा .... कुछ सुनाई नहीं पड़ा ... क्या आप इस मसले पर बात नहीं करना चाहते... अरे हा आप तो "Established" हो चुके है....

रिजल्ट २००९ ! पैसा कमाने एक नया साधन !

5-5 रूपया लागी , एगो रिजल्ट देखे खातिर !

एल रोल नंबर के रिजल्ट के बारे में जानने के लिए 5 रूपया लगेगा ! भतीजा, आकर अभी अभी मुझे बताया ठीक १० मिनट पहले इस समय सुबह का 11.31 मिनट हो रहा है और तारीख है 30.05.09).

गाँव के कुछ समझदार लडके सुबह से ही गाँव से करीब २०-२२ किलोमीटर दूर शहर में उस समाचार पत्र या कोई ऐसा माध्यम का पता लगाने के लिए गए हुए है जिससे दसवी (Up Board) के परीक्षा परिणाम हो , और वे हर विद्यार्थी से ५-५ रुपये लेकर उसका परीक्षा परिणाम बताएँगे !

है न एक अच्छा माध्यम जिससे वे बच्चे थोडा पैसा कमा लेंगे, पर बच्चो मोबाइल कंपनिया भी है बाज़ार में जो दो रुपये ४० पैसे में रिजल्ट बता रही है और वो भी मोबाइल पे !!!!

मैं दोहरी मानसिकता लेकर जीता हूँ


दोहरी मानसिकता,

क्यों हम (मेरा मतलब है मैं) क्यों मैं दोहरी मानसिकता लेकर जीता हूँ ! और सबको लगता है कितना अच्छा आदमी हूँ मैं, मेरे बारे में प्रचलित है की मैं काफी अच्छा और सीधा आदमी हूँ ! जबकि मैं वैसा नहीं हूँ ! मैं अपने एक दोस्त जो की लगभग मेरे ही जैसा है जब मिलते है, बात करते हुए तो पता ही नहीं चलता की क्या - क्या और अश्लीलता की कितनी हदों को पर कर जाते है हम ! साथ काम करने वाली लड़कियों के बारे में, उनकी शारीरिक बनावट और उनके ब्याक्तिगत (काल्पनिक) बातो को जानने का दावा तक कर डालते है !

आज एक ब्लॉग में पढ़ा (देवी देवतायों के जननांग नहीं होते) क्यों मूर्तिकर मूर्तियों को गढ़ते समय उनके जननांगो को नहीं गड़ता ! इसके पीछे क्या वास्त्विकता है ! क्या हमारा ये देवी देवतायों के प्रति श्रधा है, या कुछ और...

ब्लोगर को कमेंट्स भी डाले और मन ही मन सोचने लगा "की क्यों हम सच्चाई स्वीकार नहीं करते" की हम ...

एक दंतकथा " यक्ष को दिया गया युधिष्ठिर का जवाब बड़ा मायने रखता है कि "अगर मेरी माता माद्री मेरे सामने नग्नावस्था में आ जाएँ तो मेरे मन में पहले वही भाव आयेंगे, जो एक युवा के मन में किसी ..."

क्यों जब मेरी बिटिया के साथ कोई लड़का हंस-हंस बाते करता है तो मैं अपने बिटिया को डांट कर कहता हूँ घर के अंदर जा और मम्मी के साथ घर का काम कर ! और सबसे नज़ारे बचाते हुए गली के अन्य लड़कियों को देखता हूँ और उनसे नजदीकिया बनाने की हर संभव कोशिश में लग जाता हूँ और मौका मिलते ही...


*** दोस्तों कमेंट्स जरुर डाले और मेरी गलतियों को जरुर बताये, इससे मुझे आगे लिखने की उर्जा मिलेगी

सांप वाला लड़का ...

तू तो राज कुमार लगता है ! तेरे चेहरे की लाली बताती है तू जरुर एक दिन बड़ा आदमी बनेगा ! (जबकि मेरा रंग काला हैं)

एक १४ से १५ साल के लडके ने मुझे टोका ! हाथ में एक नन्हा सांप का बच्चा ले रखा था ! कपडे काफी गंदे से पर गेरुए रंग का पहन रखा था ! कंधे पर एक मैला सा झोला लटक रहा था ! सांप को बिलकुल मेरे चेहरे के करीब लाकर फिर बोला, "भक्त दो रुपये भोलेनाथ को दान कर, तेरे बिगडे कम बनेंगे, तू जिस कम के लिए जा रहा है उसमे तरक्की मिलेगी ! दो रुपये भोलेनाथ को दान कर !

इतने में उसका दूसरा साथी आया और उसे उसका हाथ पकड़ कर लगभग जबरजस्ती दूसरी तरफ लेकर चला गया ! क्योंकि उस लडके को मैं एकदिन इसी वजह से एक जोरदार थप्पर लगा चूका था और पकड़ कर पुलिस के पास ले जाने की धमकी दे चूका था !

क्योंकि ये लोग रोज किसी न किसी को .........

लालू जी, पासवान जी, ... सब बेरोजगार हो गए...

ब्रेकिंग न्यूज़ के स्क्रोल में पढ़ा " लालू जी, पासवान जी, ... सब बेरोजगार हो गए हैं ".

एक नेता जी का बयान "हम तो सोनिया जी को बिना सर्त समर्थन देंगे" !

मैंने सोचा चलो मंदी की मार इनके ऊपर भी पड़ी हैं ! नेता भी क्या हमसे अलग होते हैं ? जो इनके ऊपर मंदी की मार नहीं पड़ेगी ! जनाब ये तो हमारे नुमाइन्दे है ! इन्हें भी तो पता चले मंदी के मार से बेरोजगार हुए लोगे का दर्द क्या होता है ?! अब पता चलेगा जब सोनिया जी भी इन्हें ३४०० सरकारी रेट के बजाय २३००/- रुपये प्रति माह पर नौकरी देगी और वो भी पुरे १४ घंटे रोज के नौकरी करने के बाद !


अब सचाई पता चली है, की क्यों प्राइवेट कंपनियों में आज भी यानि (१९.०५.०९ तक) लडके-लड़किया मात्र २३००/- रुपये प्रति माह पर १२ - १४ घंटे कम करने को तैयार हो जाते है !

एक नादान (समझदार ) लड़की

भाई साहब! हनुमान मूर्ति, करोल बाग अगला स्टाप ही है क्या ?
बस में खड़े खड़े मै अपने बाजु में बैठे एक सज्जन से पूछ लिया ! हा बेटे अगले गोल चक्कर पे उतर जाना ! उस सज्जन ने जवाब दिया ! आगे बहुत ही जाम था सो मैंने वही उतर जाना ठीक समझा ! पर वहा से काफी चलना पड़ा मुझे, झंडेवालान मेट्रो के निचे से होते हुए मै हनुमान जी की मूर्ति के पास बहुचा ! मुझे वहा से गुडगाँव बस स्टैंड तक जाना था और गुडगाँव के लिए बस पकड़नी थी, पर आधा किलो बेसन का लड्डू ख़रीदा और चल पड़ा पहले हनुमान जी का भोग लगाने !

रात के करीब नौ बजे (करोल बाग)गुडगाँव स्टैंड पर पंहुचा, सवारिया बहुत कम थी और जो थी वो भी किसी तरह कैब-वैब पकड़ने के चक्कर में थी. मैंने भी कोशिश की पर गुडगाँव बस स्टैंड तक का कोई नहीं मिला ! थक कर मैं स्टैंड पर आकर बैठ गया ! और बस का इंतजार करने लगा ! इसी तरह २० से २५ मिनट बीत गया पर हा मेरे साथ साथ कुछ और सवारिया भी थी वहा जो बस (हरियाणा रोडवेज) का इंतजार कर रही थी !

मैं भी फुर्सत में ही था ! सो बस का इंतजार ठीक ही लग रहा था ऊपर से गर्मी का मौसम ! अपने समय से बस आई और मैं बस में खिड़की के तरफ की सीट पर बैठ गया ! बस चल पड़ी , बस में कुल १०-१२ सवारिया ही थी ! बस बहुत जल्दी धौलाकुवां बहुच गई, हा धौलाकुवां में कुछ सवारिया चढी और अ़ब कुल मिला कर २०-२५ सवारिया थी बस में ! उसमे एक लड़की भी थी धौला कुवां से चढ़ने वाली सवारियों में ! लड़की इसलिए याद है क्योंकि केवल दो ही लड़की थी पुरे बस में एक करोल बाग से चढी थी और एक धौलाकुवां से ! ज्यादा सवारी न होने के कारण बस बहुत जल्दी धौला कुवां से भी चल पड़ी ! वो लड़की अकेली थी, सफ़ेद सुट में, लेडीज सीट की ओर खिड़की के तरफ बैठ गई और जल्दी में बैठते ही मोबाइल पर लगी बातें करने, सायद बस में चढ़ते समय मोबाइल किसी से कनेक्टेड ही था !

धौलाकुवां से चढ़ने वाली सवारियों में दो लोग और थे उसमे से एक काफी देर तक बस में खडा रहा जबकी लगभग काफी सीटें खली थी पर वो (काला सा) उस लड़की के साथ वाली सीट पर बैठ गया ! बस फिर चल पड़ी ! हल्की हल्की बूंदा बंदी भी होने लगी मौसम कभी खुशनुमा लग रहा था ! आदतन बस में, कुछ (कुछ लोग जिसमे से मैं भी हूँ) दूसरी सवारियों के तरफ और पुरे बस में जरुर नजर डालते है ! मैंने भी वही किया , अचानक मेरी नजर उस सीट की तरफ रुक गई जहा वो (काला सा) और वो लड़की (सफ़ेद सुट) पहने थी ! लड़की अब भी मोबाइल पर ब्यस्त थी ! और लड़का वो (काला सा) काफी उत्तेजित सा लग रहा था और अपनी नजर में सबसे नजरे बचाते हुए उस लड़की को अपनी बायीं कोहनी से छेड़ रहा था और लगातार छेड़ रहा था, लड़की का पुर ध्यान मोबाइल में लगा हुआ था या सायद वो मोबाइल पर काफी ब्यस्त होने की नक़ल कर रही ! चाहे जो भी हो पर वो (काला सा) लड़का अब उस लड़की के वक्षो को सहलाने की भी कोशिस कर रहा था ! इस बार लड़की ने उसका हल्का सा विरोध किया और लड़का थोडा डरा और पूरा डरने का नाटक करने लगा ! लड़की ने विरोध में इतना किया की अपना पर्स अपने और उसके बिच रख लिया और फिर मोबाइल पर वयस्त हो गई पर उस लडके का उससे ज्यादा विरोध नहीं किया ! वो (कला सा) लड़का जिसकी हिम्मत काफी बढ़ चुकी थी इस बार फिर अपने कोहनी से नहीं बल्कि अपनी दाई हाथ से (लड़की जो उसके बायीं तरफ बैठी थी) लड़की के वक्ष को भिचा, लड़की इस बार सायद दर्द से कराह उठी और हल्का सिर्फ हल्का सा विरोध किया ! और फिर मोबाइल पर व्यस्त हो गई !

मैं इसबार अपने जगह से उठा और उस (काला सा) लडके का विरोध किया ! जितना हो सका अपने पुरे दम ख़म से उस लडके को डराने की कोशिश की और कहा " क्यों बे क्यूँ उस बेचारी लड़की को छेड़ रहा है" लड़का कुछ डरा और अपने डर को छुपाते हुए कहा "देखा क्या तुने" मैंने कहा "हा देखा और काफी देर से देख रहा हूँ तेरी गन्दी हरकत" तेरे घर में तेरी बहन नहीं है क्या ! ये भी तो किसी की बहन होगी" उस लडके का दूसरा साथी भी उसी की तरफ से मुझे ही मारने-वारने की धमकी देने लगा ! बस की दूसरी सवारिया केवल हमारी बातें सुन रही थी पर किसी का support मुझे नहीं मिला ! मैं भी अकेले उनसे लड़ने का मन बना लिया था ! दुसरे ने कहा "तेरी चाची लगती है क्या पूछ उससे, क्या "xxxx" पकडी है मैंने उसकी ! लड़की अब भी मोबाइल पर बातें कर रही थी ! पर उसके सवाल का जवाब नहीं दिया

और बात बढ़ते देख चुपचाप वह वहा से उठकर आगे की तरफ बढ़कर एक खाली सीट पर बैठ गई ! अब दोनों लडके मिलकर मुझे डराने की कोशिश करने लगे और ! बस अब तक (सुखराली) पहुच चुकी थी ! वो दोनों लडके सुखराली के ही थे या किसी कारन वस् वही उतरने लगे और मुझे बार बार धमकिया दे रहे थे "उतर तू सुखराली, बताते है तेरी चाची को कैसे छेडा"

वो दोनों तो वही उतर गए, पर लड़की सायद गुडगाँव तक जाने वाली थी और मैं भी गुडगाँव स्टैंड तक ! अब बस में खामोशी थी, सायद सभी कुछ न कुछ बोलने वाले थे पर सब खामोश थे, लड़की भी खामोस थी, मै भी खामोश था, सवारिया भी खामोस थी ! और बस ड्राईवर भी खामोशी से ही बस चला रहा था ! चारो तरफ खामोशी थी !

गुडगाँव बस स्टैंड आया और सभी सवारिया उतरने लगी ! एक नजर मै उस लड़की को जरुर देखा जो अब भी मोबाइल पर बातें कर रही थी !

मैं उदास जरुर था पर एक बात सोचने पर जरुर मजबूर हुआ की "क्यों हम सभी बड़ी बड़ी बातें करते है और जब जरुरत आन पड़ती है तो चुप रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं)

...........................

वो मुझे अच्छी लगती है.

उसका नाम गुलाबो है (मेरे खयालो की), (pinky) वो १४ साल की होगी और मे ३२ साल का , क्या मेल है ! जनाब मेल वेल तो तेल बेचते है ! यहाँ बात कर रहा हूँ ... Hmmmmm... क्या सोंचने लगे ?. हा... बिलकुल वही.? ( ???)

रोज देखता हूँ उसे, उसके हर अंग को, हर अदा को, हर उस बात को जो उसमे खास लगती है. पर गुस्सा आता है जब कभी वो नहीं दिखती है. सोंच की कल्पना में उड़ जाता हूँ की आज क्यों नहीं दिखी, मन दुखी हो जाता है ! और रोड के किनारे किनारे चल पड़ता हूँ क्योंकि ऑफिस भी तो टाइम पर पहुचना है ! पर अगले ही पल फासला ख़त्म हो जाता है. और भीड़ की रेल्लम पेल आ जाती है. और मे भी उसी में खो जाता हूँ क्यों की अगले चौहरे पर ऑटो स्टैंड है. जहा से मे ऑफिस के लिए ऑटो पकड़ता हूँ.! ऑटो में जगह लेने की होड़ में शामिल हो जाता हूँ ! यहाँ ऑटो वालो की भी एक आदत मुझे अजीब सी लगती है, अजीब ये की जिस [सवारी] की तलास में वो सुबह-सुबह नहा-धो कर पूजा पाठ कर , भगवन का आशीर्वाद लेकर, घर से निकलते है और जब वो [सवारी] उनके पास होती है उनके ऑटो में बैठने के लिए उतावली होती है. तो उनके नखरे देखने लायक होते है ! असोभानिये शब्द का इस्तेमाल ! और कभी कभी तो अपने ऑटो में ना बैठने देने की हिदायत भी दे डालते है ! और अगले कुछ समय बाद यानी ऑफिस टाइम के बाद जब सवारिया कम हो जाती है तब, एक सवारी जो पास की पान की दुकान से पान लगवा रहा हो और ऑटो वाला यह भाप जाये की वो उसकी ऑटो में बैठेगा ,तब ऑटो वाला तब तक उसका इन्तेजार बीच रोड में करेगा जब तक सवारी पान खाकर, दुकान वाले को सौ का नोट देकर खुल्ले वापस लेकर पान की दो - चार किल्ली रोड पर न थुक दे ! ऑटो वाला फिर उससे प्यार से पूछेगा " चलना है भाई" सवारी (पान की जुगाली) करते हुए ना में सिर हिला कर पास ही खड़ी अपनी साइकल की योर चल पड़ता है. (यह वाकया रोज तो नहीं होती पर एक बार मै देख चूका हूँ)

अगले दिन फिर वही उसी को एक पल देख लेने की चाहत ! अक्सर वो दिख भी जाती है ! आज का वाकया लिख रहा हूँ ! आज मैं सड़क के रांग साइड से था जिधर से वो रोज आती है ! शायद पास ही किसी Institute में पढ़ने जाती है. ! आज मै उसे पास से देखा फासला कोई 90 से 100 फिट की दुरी का था और समय 3 से 3.30 मिनट का ! आज वो एक बहुत ही अछे चूडीदार और उसी के मेचिंग के सभी चीजे पहन रखी थी ! शारीर की बनावट भी किसी तरह कम नहीं है उसकी इसलिए तो "वो मुझे अछी लगती है" मेरी नजर में नारी की बक्ष ही आकर्षण का मुख्या केंद्र है ! मै आजतक उसे सड़क के उस पर से देखा था उसके लिए सड़क का लेफ्ट साइड मेरे लिये सडक का राइत साइड । आज वो बहुत ही खुबसुरत लग रही थी ! बिलकुल किसी अप्सरा की तरह ! सुबह का नौ बज रहा था मौसम बिलकुल साफ था । सब कुछ साफ और सुहावना लग रहा था ! 90 - 100 फीट की दुरी कम होकर अ़ब 40 - 50 फीट रह गई थी ! वो करीब और करीब आती जा रही थी ! मै उसको लगातार देखे जा रहा था !

४० से ४५ सेकण्ड के कम समय में मै उसको पूरी तरह देख लेना चाहता था ! मेरी मानसिक इस्थिति ऐसी थी जैसे किसी किसी मर्डर मिस्ट्री फिल्म को देखते वक़्त दर्शक कातिल को जल्द से जल्द पहचान लेने की मन ही मन ख्वाहिज रखता हो ! मेरी हालत भी वैसी ही थी ! उतने कम समय में मै उसे (उसको) पूरी तरह देख लेना चाहता था ! फासला अ़ब खत्म होकर 20 से 10 फीट की दुरी का रह गया था ! मै उसे साफ साफ देख रहा था ! उसके मासूम से चेहरे को ! उसके बालो को ! उसके सभी अंगो को ! बारीकी से उसके आखो को ! उसके होठो को ! उसके चलने के अंदाज को ! उसके बॉडी लैंग्वेज को ! पता नहीं फिर कभी उसे देखने का मौका मिले न मिले ! ! ! ! . . . ****/ / / @ ! $ %*~~~ पापा ! पापा ! पापा ! ! ! मेरी बिटिया २ साल की है. ! जब ऑफिस से आता हूँ तो वो मेरे पास दौडी दौडी आती है ! ठीक से बोलना भी अभी तक नहीं सिख पाई है ! पर तोतली जुबान से पता नहीं क्या क्या एक साँस से कहती चली जाती है ! फिर ताफी (टाफी) और कुकुरे (कुरकुरे) की फारमाईस ! मैं भी उसके साथ उसी के भाषा में सुरु हो जाता हूँ ... और खो जाता हूँ आनंद के सागर मे ...

सायद गुलाबो (मेरे खयालो की pinky) के पापा भी उसे मेरी बिटिया के तरह ही तो प्यार करते होंगे ! पिंकी भी बहुत अछी हैं, और मेरी बिटिया भी ! क्योंकि वो मुझे अछी लगती है...


.ब्राजील ने मनाया “अंडरवीयर डे”
अरे, कपड़े पहनाना भूल गए? नहीं, नहीं ऎसी कोई बात नहीं। ये लोग तो ब्राजील में मंगलवार को मनाए गए तीसरे “अंडरवियर डे” दिवस में शरीक होने जा रहे थे। यह दिन मनाने के लिए पुरुष-महिला मॉडल अंतर्वस्त्रों में एक बस अड्डे के पास इकट्ठे हुए। इस अनोखे ‘अंडरवीयर दिवस” की शुरुआत 2003 में न्‍यूयॉर्क में हुई थी। (तस्वीर : एपी)

क्या इन लोगो ने कभी भूख दिवास (HUNGRY DAY) मनाया होगा !!! नही !!! कभी शिक्षा दिवस (EDUCATION DAY) मनाया होगा !!! नही !!! नही नही कभी नही !!! ये लोग केवल अंडरवियर दे या सेक्स डे मनाते है. क्योंकि ये लोग केवल " RAV PARTY और PUB " में ही नजर आते है. ड्रग का धंधा करते है. न्यू जेनरेशन को अपने तरफ़ ATTRACT करने के लिए कभी कभी दिन में (UNDERWEAR DAY) मानते है. और कुछ नही

यह तस्बीर भी ब्राजील की है


आवारा औरत, by prem lata

सायद यह कहानी आपको पसंद आए, और कुछ सिख भी मिले, Originally powered by http://pasand.wordpress.com/2008/02/07/suffered-woman/


आवारा औरत

By प्रेमलता पांडे

मंजुला दो भाइयों की अकेली बहिन थी। छोटे से क़स्बे में पली-बढ़ी मंजुला ने स्नातकोत्तर तक की शिक्षा प्राप्त की और प्रायवेट कंपनी में काम करने लगी। उसने भी जीवन के वही सपने देखे जो हर लड़की देखती है। पिता ने अनेक वर ढूंढ़े पर कोई लड़का पसंद नहीं आया। एक दिन पिता खीज गए और लड़की को ताने देने लगे। लड़की महसूस कर गयी और कह दिया कि अगली बार कोई लड़का ढूंढ़ा जाएगा तो वह कुछ नहीं कहेगी।पिता ने एक बड़े शहर में लड़का ढूंढा। लड़के की शिक्षा असल से ज़्यादा बताई गई, उसका पद और तन्ख्वाह भी असल से ज़्यादा बताए गए। चूँकि रिश्ता रिश्तेदार करवा रहे थे तो ज़्यादा पूंछ्ताछ नहीं की गयी। लड़्की ने तो कुछ न बोलने का प्रोमिस कर ही दिया था सो शादी हो गयी।शादी होकर मंजुला ससुराल आगयी।

एक दिन अचानक ससुर का देहावसान हो गया। घर में मंजुला और उसके पति के अलावा उसकी सास और दो देवर थे। ससुर के मरने पर सास तो उदासीन हो गयी। मंजुला को घर की सारी ज़िम्मेदारी दे दी गयीं। वह चुपचाप सबकुछ करती रही। तभी उसे पता चला कि उसका पति न तो उतना कामाता है और न ही उसकी उतनी शिक्षा है। इतना ही नहीं वह शराब भी जी भरकर पीता है, जिसकारण से घर में पैसा भी नहीं देता है। बहुत निराश हुई मंजुला, फिर भी सोचा कि चलो पति को समझाया जाए शायद कुछ ठीक हो जाए पर कहाँ?  वह तो मारपीट और करने लगा। रोज झगड़े होने लगे। सास तो बहु को ही कसूरवार ठहराती। देवर कुछ बीच में ही नहीं पड़ते। इसी बीच मंजुला ने एक पुत्र को जन्म दिया। कुछ समय बाद मंजुला ने पुनः जॉब पर जाने की सोची तभी सास ने बच्चे को रखने से मना कर दिया। अब क्या था निराश-हताश और परेशान मंजुला पैसे-पैसे को तरस गयी। एक दिन पति से अत्यधिक सतायी जाने पर उसने अपने बच्चे के साथ घर छोड़ दिया। अकेले अपनी किसी सहेली की मदद से किराए पर घर ले लिया। बच्चा क्रेचे में छोड़कर नई नौकरी करने लगी। चूंकि वह अकेली रहती थी तो  ससुरालवाले  जलभुन  गए, क्योंकि इसतरह अकेली रहकर उनकी नाक काट रही थी वह। घर-बाहर के कई लोगों को समझाने के लिए भेजा। पर मंजुला अब और न सह सकती थी सो अडिग रही।

धीरे-धीरे मंजुला अपने को सहज बनाने की कोशिश करती रही। वह इतनी व्यस्त रहती कि किसी से बात भी न कर पाती लोगों ने अनेक तुक्के लगाने शुरु कर दिए। उसे अवारा और चरित्रहीन भी कहा जाने लगा। पुरुष उससे हंस-हंसकर बात करने की कोशिश करते और घर जाकर अपनी स्त्रियों से उससे बात करने से मना करते क्योंकि वह अच्छी स्त्री नहीं थी। स्त्रियाँ बिना जाने-बूझे उसे अवारा कहतीं। वह पूरी गली में अच्छी औरत नहीं मानी जाती। आते-जाते उसे अजीब नज़रों से देखा जाता! पर वह किसी बात की परवाह किए बिना अपनी ज़िंदगी जीती रही  ऐसा नहीं था कि वह कभी पिघलकर आँसू नहीं बनती थी, पर उसे अपना  जीवन-यापन करना आता  था।

कैसा लगा आपको, कृपया अपना राय दे. !

कौन जिम्मेदार ? नॉएडा MMS ?












कौन जिम्मेदार नॉएडा MMS Published: Fri, 20 Feb 2009 at 09:34 ईस्ट
कल मैंने एक न्यूज़ पड़ा (http://www.samaylive.com/news/noida-mms-is-available-at-download-websites-for-free/609604) , 
एक और लव स्टोरी (एक और SCANDLE) साथ ही चाँद और फिजा का स्टोरी भी पड़ा हम अपनी गलतियों को दुसरो के ऊपर डाल देते है. फिजा ने चाँद से मुहब्बत की , प्यार के नगमे गए ( जनम जनम का साथ है तुम्हारा हमारा ,अगर न मिले इस जन्म में तो लेंगे जनम दुबारा ) कुछ दिन के बाद फिजा चाँद को बेवफा का खिताब दे दिया और MEDIA में छा गई , फिजा मैडम वो दिन भूल गई जब चाँद के बारे में जानते हुए भी आपने एक औरत की जिंदगी ख़राब की थी वो भी तो एक औरत थी ( चाँद की पहली धर्मपत्नी ) आज सायद अब उसकी बारी है, चाँद को सायद अपनी गलती का एह्साह हो गया है. और वो अपने पहली बीबी से वफ़ाई कर रहा हो और आज आप रो रही है. कल उसके आखो के आपने देखा था सायद वो भी आपके जैसे ही रो रही थी और आप प्यार के नगमे गा रही थी आप गलती करे तो ठीक , दुसरे करे तो ४२० ,  

अब आते है NOIDA SCANDL पर उस लड़की को जरुरत ही क्या थी अपने दोस्त (पूर्ब प्रेमी ) के साथ शादी के पहले (माडर्न बनने की ). 
प्यार था तो उसे एहसास करती , mms बनवाने के पहले जरा अपने (पापा और मामी ) के बारे में सोची होती जो आपको इतनी आजादी दे रखी है की आप बड़ी है और अपना अच्छा ख्याल रख सकती है (आजादी न देने पर पापा मामी पुराने ख्याल के है ) वो क्या जाने नए ज़माने को . और आप आज रो रही है. मै तो आपको ही दोस दूंगा आप बेकार में अपनी और अपने पापा मामी की इज्जत (ख़राब कर चुकी है ) आप सोच कर देखे एक ( गलती किसकी है ) 
जरा सोच कर देखे [ फोटो ] इसके लिए कौन जिम्मेदार है.

(girls please be careful, don't misuse your parents freedom)

क्या हम उदार नही

क्या हम उदार नही है,
क्या हमारे उदारवादी होने का मतलब ये है की हम सांप्रदायिक है. हिंदू और हिन्दुस्त्वा की बात करे तो हम सांप्रदायिक है.
क्या दूसरो को हम पर तोहमत लगना की हम सांप्रदायिक है ? सही है. ?

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१. विश्व में लगभग ५२ मुस्लिम देश हैं, एक मुस्लिम देश का नाम बताईये जो हज के लिये "सब्सिडी" देता हो ?
२. एक मुस्लिम देश बताईये जहाँ हिन्दुओं के लिये विशेष कानून हैं, जैसे कि भारत में मुसलमानों के लिये हैं ?
३. किसी एक देश का नाम बताईये, जहाँ ७०% बहुसंख्यकों को "याचना" करनी पडती है, ३०% अल्पसंख्यकों को संतुष्ट करने के लिये ?
४. एक मुस्लिम देश का नाम बताईये, जहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमन्त्री गैर-मुस्लिम हो ?
५. किसी "मुल्ला" या "मौलवी" का नाम बताईये, जिसने आतंकवादियों के खिलाफ़ फ़तवा जारी किया हो ?
६. महाराष्ट्र, बिहार, केरल जैसे हिन्दू बहुल राज्यों में मुस्लिम मुख्यमन्त्री हो चुके हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मुस्लिम बहुल राज्य "कश्मीर" में कोई हिन्दू मुख्यमन्त्री हो सकता है ?
७. १९४७ में आजादी के दौरान पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या 24% थी, अब वह घटकर 1% रह गई है, उसी समय तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब आज का अहसानफ़रामोश बांग्लादेश) में हिन्दू जनसंख्या 30% थी जो अब 7% से भी कम हो गई है । क्या हुआ गुमशुदा हिन्दुओं का ? क्या वहाँ (और यहाँ भी) हिन्दुओं के कोई मानवाधिकार हैं ?
८. जबकि इस दौरान भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10.4% से बढकर ३०% हो गई है, क्या वाकई हिन्दू कट्टरवादी हैं ?
९. यदि हिन्दू असहिष्णु हैं तो कैसे हमारे यहाँ मुस्लिम सडकों पर नमाज पढते रहते हैं, लाऊडस्पीकर पर दिन भर चिल्लाते रहते हैं कि "अल्लाह के सिवाय और कोई शक्ति नहीं है" ?
१०. सोमनाथ मन्दिर के जीर्णोद्धार के लिये देश के पैसे का दुरुपयोग नहीं होना चाहिये ऐसा गाँधीजी ने कहा था, लेकिन 1948 में ही दिल्ली की मस्जिदों को सरकारी मदद से बनवाने के लिये उन्होंने नेहरू और पटेल पर दबाव बनाया, क्यों ?
११. कश्मीर, नागालैण्ड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, क्या उन्हें कोई विशेष सुविधा मिलती है ?
१२. हज करने के लिये सबसिडी मिलती है, जबकि मानसरोवर और अमरनाथ जाने पर टैक्स देना पड़ता है, क्यों ?
१३. मदरसे और क्रिश्चियन स्कूल अपने-अपने स्कूलों में बाईबल और कुरान पढा सकते हैं, तो फ़िर सरस्वती शिशु मन्दिरों में और बाकी स्कूलों में गीता और रामायण क्यों नहीं पढाई जा सकती ?
१४. गोधरा के बाद मीडिया में जो हंगामा बरपा, वैसा हंगामा कश्मीर के चार लाख हिन्दुओं की मौत और पलायन पर क्यों नहीं होता ?
१५. क्या आप मानते हैं - संस्कृत सांप्रदायिक और उर्दू धर्मनिरपेक्ष, मन्दिर साम्प्रदायिक और मस्जिद धर्मनिरपेक्ष, तोगडिया राष्ट्रविरोधी और ईमाम देशभक्त, भाजपा सांप्रदायिक और मुस्लिम लीग धर्मनिरपेक्ष, हिन्दुस्तान कहना सांप्रदायिकता और इटली कहना धर्मनिरपेक्ष ?
१६. अब्दुल रहमान अन्तुले को सिद्धिविनायक मन्दिर का ट्रस्टी बनाया गया था, क्या मुलायम सिंह को हजरत बल दरगाह का ट्रस्टी बनाया जा सकता है ?
१७. एक मुस्लिम राष्ट्रपति, एक सिख प्रधानमन्त्री और एक ईसाई रक्षामन्त्री, क्या किसी और देश में यह सम्भव है, यह सिर्फ़ सम्भव है हिन्दुस्तान में क्योंकि हम हिन्दू हैं और हमें इस बात पर गर्व है, दिक्कत सिर्फ़ तभी होती है जब हिन्दू और हिन्दुत्व को साम्प्रदायिक कहा जाता है...?
१८.वो साठ सालो का आपका दर्द क्या है कहा है किस बात का है ताकी इलाज कराया जा सके...?
१९.वो टीस किस बात की है देश हित मे खुलासा करे...?

क्या ये हमारी भारतीय संस्कृति है. या !!! ?








Jara gaur kare : 







या ये हमारी भारतीय संस्कृति है ?